देवी भाग्वात् पुराण के अनुसार भगवान विष्णु के चक्र से कटकर देवी सती के अंग के 51 टुकड़े हो गए। देवी सती के अंग के 51 टुकड़े धरती पर जहां जहां गिरे वह स्थान शक्तिपीठ के रुप में प्रतिष्ठित हो गए।माना जाता है कि इन शक्तिपीठों में आदि शक्ति स्वयं विराजमान रहती हैं। एेसा ही एक शक्तिपीठ है पंजाब के जलंधर शहर, जो त्रिपुरमालिनी शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है।
देवी का स्तनपीठ
एेसी मान्यता है कि इस शक्तिपीठ में देवी सती का स्तन गिरा था। इसलिए इसे स्तनपीठ भी कहते हैं। इस मंदिर में पीठ स्थान पर स्तनमूर्ति एक कपडे से ढकी रहती है। जबकि मूर्ति का धातु से बना मुख मंडल बाहर दिखाई देता है। आम दिनों की बात करें तो यहां रविवार आैर मंगलवार के बड़ी संख्या में ऋद्धालु आते हैं। जबकि नवरात्र के दिनों में तो यहां की रौनक देखते ही बनती है। चैत्र नवरात्र की पंचमी तिथि के दिन यहां भव्य मेला लगता है।
यहां मिलता है मोक्ष पशुओं को भी
त्रिपुरामालिनी शक्ति पीठ के विषय में कहा गया है कि इस स्थान पर संयोगवश भी जिसकी मृ्त्यु हो जाती है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यहां तक की अगर कोई पशु भी यहां प्राण त्याग देता है, तो वह भी सद्गति प्राप्त कर लेता है। इस शक्ति पीठ से जुडी अन्य मान्यता के अनुसार यहां सभी देवी देवता व अन्य सभी तीर्थ भी अंश रुप में रहते है।

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