इस ड्रेस (सफेद पाजामा व गाउननुमा शर्ट) से तो अच्छा नंगा भला। पोशाक पहनकर जोकर दिखता हूं। कुछ इस तरह के व्यंग्य-बाणों से शुक्रवार को जेएलएनएमसीएच में नर्सो को दो-चार होना पड़ा। नर्से मरीजों को अस्पताल ड्रेस पहनाने पहुंची थीं। उनके जाने के बाद इनडोर के कई विभागों में भर्ती कुछ रोगियों ने तो ड्रेस खोलकर उसे तकिए के नीचे छिपा दिया। ऐसे भी मरीज मिले, जो चार दिनों से एक ही ड्रेस पहने थे, उन्हें दूसरा ड्रेस मिला ही नहीं। इस बात को खुद नर्से भी पुष्ट करती हैं। उनके मुताबिक मरीज अस्पताल के कपड़े पहनना ही नहीं चाहते। अस्पताल प्रबंधक चंद्रकांता को भी जब मरीजों को ड्रेस पहनाने में मशक्कत करनी पड़ी तब अस्पताल अधीक्षक द्वारा सूचना निकाली गई, जिसमें मरीजों को ड्रेस पहनना अनिवार्य बताया गया।
इनडोर सर्जरी विभाग में भर्ती बुजुर्ग मरीज ब्रजनंदन सिंह लुंगी पहने थे। नर्सो द्वारा ड्रेस पहनाने के बाद उन्होंने कहा कि इसे पहनकर कार्टून लगता हूं। मेडिसीन, हड्डी, इमरजेंसी आदि विभागों में अधिकांश मरीजों ने यह कहकर ड्रेस पहनने से मना कर दिया कि गर्मी लगती है। वहीं हड्डी रोग विभाग में भर्ती शालीग्राम, पंकज चौधरी, परशुराम, रामदेव मरीजों ने बताया कि पिछले चार दिनों से एक ही ड्रेस पहने हैं, जबकि प्रतिदिन साफ ड्रेस देना है।
उल्लेख हो कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को संक्रमण से बचाने के लिए पहली बार सरकार द्वारा पोशाक दी गई है। छह हजार ड्रेस की आपूर्ति की गई है। कपड़ों की साइज सामान्य है।
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