शहर में सड़कें गढ्डों में तब्दील हो गई हैं। इन पर चलना दूभर हो गया है। सूरज ढलने के बाद गढ्डों में सड़क तलाशनी पड़ती है। शहर के बीचोंबीच से गुजर रहे एनएच पर तो हर 20-25 फीट की दूरी पर वाहनों के आकस्मिक ब्रेक लगाने पड़ते हैं। जरा सा चूकते ही शरीर के अस्थिपंजर ढीले हो रहे हैं। 20 फीट चौड़ी अधिकांश सड़कों पर मात्र आठ-दस फीट की चौड़ाई ही चलने लायक बची है। कहीं-कहीं तो सड़क ही नहीं बची है।
शनिवार को ही तिलकामांझी क्षेत्र में जेल के पास गढ्डे में मोटर साइकिल से गिरकर चार-पांच दुपहिया वाहन सवार जख्मी चुटहिल हो गए। रिक्शा पलटने से उस पर सवार महिला का हाथ टूट गया। उसकी बेटी की ठोढ़ी फट गई। पैदल चलने वालों की भी शामत है। तेज रफ्तार वाहनों के गुजरने पर गढ्डों में भरे पानी-कीचड़ से राहगीर सन रहे हैं। सड़कों की बदहाली से यातायात की रफ्तार पर भी असर पड़ रहा है। अक्सर जहां-तहां गढ्डों में फंसकर खराब होने वाले वाहनों के कारण जाम लग जाता है। शनिवार को भी पोस्ट ऑफिस के पास, पटलबाबू रोड, तिलकामांझी जेल रोड, कचहरी चौक के पास जाम से लोगों को जूझना पड़ा।
यह स्थिति तब है जब मई माह में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सेवा यात्रा के दौरान नाथनगर से लैलख-ममलखा तक एनएच-80 की मरम्मत कराई गई थी। सीएम के जाते ही दस दिनों के बाद ही सड़कें टूटने लगी थीं।
कोट-
जैसे-जैसे पैसा मिलता है सड़कों की मरम्मत कराई जाती है। फंड उपलब्ध होने के बाद जर्जर सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी।
राकेश कुमार, कार्यपालक अभियंता, एनएच-80
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