pp

Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

Tuesday, 14 August 2012

दीवानों की याद दिलाता है बिहपुर का स्वराज आश्रम

.
भागलपुर जिले के बिहपुर प्रंखड स्थित स्वराज आश्रम आज भी आजादी के दीवानों की याद दिलाता है. इतिहास के जानकार बताते है कि नमक सत्याग्रह और राष्ट्रीय झंडा फहराने को लेकर यहां पर अंग्रेज सरकार ने काफी जुल्म किये. नमक सत्याग्रह के दौरान वैसा जुल्म बिहार में अन्यत्र कहीं नहीं हुआ. भागगलपुर जिला मजिस्ट्रेट 31 मई 1930 को आरक्षी अधीक्षक और सहायक आरक्षी के साथ आश्रम आये. उनके साथ समान्य पुलिस व हथियारबंद सैनिक भी काफी संख्या में थे. आश्रम में उस समय कांग्रेस क ा कार्यालय व खादी भंडार था. 1 जून को तीसरे पहर नशाबंदी कार्यक्रम में शराब व गांजे की दुकानों पर कार्यकर्ता धरना देने लगे. वहां मौजूद यूरोपीय अधिकारी स्वयं सेवको को दुकान से हट जाने को कहा लेकिन स्वयं सेवको का धरना जारी रहा. अधिकारियों के आदेश पर अंग्रेजों ने स्वंय सेवको को बुरी तरह पीटा व राष्ट्रीय झंडा छीन कर जला दिया. अंग्रेज खादी भंडार पर भी कब्जा जमा लिया. आनन फानन में एक सभा बुलायी गयी, जिसमें यह फैसला हुआ कि कांग्रेस कार्यालय पर फिर से कब्जा के लिए स्वयं सेवक का एक जत्था जायेगा. 2 जून से स्वयं सेवकों व आसपास के ग्रामीण जत्था बन कर कांग्रेस भवन की ओर बढने लगे. पुलिस उनपर बेरहमी से डंडे बरसायी. 6 जून को विशाल आमसभा हुई. उस दिन भी अंगरेजों ने स्वयं सेवकों को बुरी तरह से पीटा. स्थिति बिगड़ती चली गयी और इसकी सूचना पटना पहुंची. प्रोफेसर अब्दुल बारी, बलदेव सहाय, ज्ञान साहा राजेन्द्र बाबू अपने सहयोगियों के साथ बिहपुर आये. तीसरे पहर फिर उसी बगिचे में कांग्रसी स्वयं सेवकों की एक आमसभा हुई. इस सभा में राजेन्द्र बाबू प्रो बारी और आरीफ के भाषण हुए. सभा शाम 5 बजे समाप्त हुई. फिर आरक्षी अधीक्षक ने अपने पुलिस दस्ते को लेकर बिहपुर बजार गये. जहां राजेन्द्र बाबू और कुछ अन्य लोग भी थे. पुलिस फिर लाठी बरसाने लगी. राजेन्द्र बाबू, बलदेव सहाय,अब्दुल बारी मुरली मनोहर प्रसाद,ज्ञान साहा भी पुलिस की इस कार्रवाई में जख्मी हुए


No comments :

Post a Comment