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Wednesday, 22 August 2012

पानी में बह गये करोड़ों रुपये

नवगछिया अनुमंडल में इस बार भी विभित्र जगहों पर कई महत्वाकांक्षी योजनाओं से कार्य किया गया. लोगों को उम्मीद थी कि इस बार लोगों को कटाव और बाढ. से निजात मिल जायेगी. लेकिन, जो पिछले आठ वर्ष से हो रहा था वही हुआ. इस बार भी लगभगत 70 फीसदी कार्य विफल हो गया है. इसी वर्ष किये गये कटाव निरोधी कार्य का हश्र देख कर नवगछिया वासी ठगा सा महसूस कर रहे हैं. यहां प्रस्तुत है विभित्र जगहों पर किये गये कार्य की स्थिति.

                                 राघोपुर

इस बार राघोपुर में दो जगहों पर बांध निर्माण का कार्य किया गया. इन दोनों जगहों पर बोल्डर पिचिंग बांध वर्ष 2011 के जुलाई माह की बाढ. में और वर्ष 2012 के जनवरी व मार्च में ध्वस्त हुआ था. पिछले वर्ष ध्वस्त हुए बांध पर पांच करोड़ 29 लाख 77 हजार की राशि से बोल्डर पिचिंग का कार्य किया गया था. वहीं इसी वर्ष जनवरी माह में ध्वस्त हुए बांध की मरम्मत जियो बैग टेक्नोलॉजी से करायी गयी थी. बोल्डर पिचिंग वाला कार्य का अधिकांश भाग नदी में विलीन हो चुका है. बांध ध्वस्त होने का कारण अभियंताओं की तकनीकी चूक और आधारभूत कार्य में की गयी गड़बड़ी माना जा रहा है.

                                गोपालपुर

गोपालपुर में वर्ष 2008 से लागातार कटाव निरोधी कार्य किया जा रहा है, लेकिन हर बार विभाग को विफलता का ही सामना करना पड़ा है. कार्य शुरू करने में हर बार देरी की जाती है. ग्रामीणों के हो हंगामा पर कार्य को आनन-फानन में मन माफिक तरीके से पूरा कर लिया जाता है. इस वर्ष गोपालपुर में कुल मिला कर क रीब 24 करोड़ की राशि से कार्य किया गया था. इसमें इस्माइलपुर से बिंद टोली तक स्पर तीन से सात तक कटाव निरोधी कार्य किया गया था. इनमें छह और चार पूरी तरह से ध्वस्त हो गये हैं, जबकि सात ध्वस्त होना शुरू हो गया है.

                                  पिपरपांती 

पिछले वर्ष हुए कटाव के मद्देनजर इस वर्ष कोसी तटीय क्षेत्र पिपरपांती में तीन करोड़ 37 लाख की लागत से जीयो बैग टेक्नोलॉजी से कार्य कराया गया था जो पूरी तरह से विफल हो गया है. ग्रामीणों का कहना है कि आधारभूत कायरें में लापरवाही बरती गयी थी. कई जगहों पर सतही कार्य नहीं किया गया था जिससे यहां पर कार्य पूरी तरह से ध्वस्त हो गया.

                                  मंदरौनी 

 रंगरा चौक प्रखंड के मंदरौनी गांव में इस बार 56 लाख की लागत से परक्यूपाइन तकनीक से कार्य किया गया था. परक्युपाइन के स्तंभ की ढलाई और इसे तट पर ठीक से सेट नहीं करने के कारण यहां भी किया गया पूरा कार्य विफल हो गया. फिलहाल कोसी के मुहाने पर यहां का जमींदारी बांध आ गया है.
                                  नरकटिया 

पिछली बार नरकटिया के जमीनदारी बांध के ध्वस्त हो जाने के बाद इस बार 76 लाख की लागत से बांध का निर्माण कराया गया था. बांध में मिट्टी के दबाव का कार्य ठीक से नहीं करने के कारण बांध में दरार आ गयी है. एक बार फिर लोग बांढ. की आशंका से सहमे हैं.
                      इस वर्ष कराया गया कटाव निरोधी कार्य

गोपालपुर इस्माइलपुर बिंद टोली तक बोल्डर पिचिंग कार्य स्पर तीन से सात▪कुल लागत 22.49 करोड़ 

इस्माइलपुर-गोपालपुर के स्पर पुनस्र्थापन का कार्य▪

कुल लागत एक क रोड़ 66 लाख 97 हजार 

बिहपुर से त्रिमुहान में जियो बैग टेक्नोलॉली से किया गया कार्य▪कुल लागत एक करोड़ छह हजार 

राघोपुर में बोल्डर पिचिंग की मरम्मत▪कुल लागत पांच करोड़ 29 लाख 77 हजार 

भवनपुरा मैरचा में कटाव निरोधी कार्य▪कुल लागत 39 लाख 90 हजार 

नरकटिया में बांध निर्माण का कार्य▪कुल लागत 74 लाख 72 हजार 

मंदरौनी में कटाव निरोधी कार्य▪लागत 56 लाख 

पिरपांती में जियो बैग से कटाव निरोधी कार्य▪तीन करोड़ 37 लाख 

राघोपुर में धसान स्थल का मरम्मत कार्य▪कुल लागत दो करोड़ 32 लाख

क्या कहते हैं पदाधिकारी

इस बारे में मैं कोई भी प्रतिक्रिया देने में असर्मथ हूं. 
कैलू सरदार, मुख्य अभियंता , भागलपुर प्रमंडल , जल संसाधन विभाग 

इस बार ज्यादातर जगहों पर जियो बैग से कार्य किया गया था. जियो बैग की लांचिंग टेंडेंसी काफी कम होती है इसलिए जगह-जगह पर कार्य विफल हो रहा है. 
गिरीजानंदन सिंह, कार्यपालक अभियंता , जल संसाधन विभाग



                                  

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