करीब एक वर्ष पहले इस गिरोह के इसी तरह के कारनामे सामने आये थे. प्रोफेशनल शूटर रहे एक अपराधी ने जिले के एक सफेदपोश की सुपारी ले ली और उसे टपकाने का प्रयास किया. इसके बाद उक्त व्यक्ति की सुपारी उसके गिरोह के लोगों को ही दे दी गयी. बात हुई थी हत्या कर लाश को गायब करने का, लेकिन कोई न कोई सबूत जिससे पता चले की उक्त व्यक्ति मारा गया है प्रस्तुत करना होगा. गिरोह ने ऐसा ही किया और आपने ही गिरोह के उस शूटर को काट कर कोसी में बहा दिया और सिर काट कर उसके मरने के सबूत को दिखा कर हत्या के एवज में रकम की प्राप्ति की. यह मामला नवगछिया के सीमांत क्षेत्र का है. उक्त शूटर अभी तक पुलिस की नजर में लापता है. कुरर्सेला थाने में इस कांड का मामला दर्ज किया गया था. इस गिरोह का कोई सरगना नहीं है. कब कौन सुपारी ले ले और कब किसके साथ वारदात को अंजाम दे दे कहना मुश्किल है. जिले से बाहर हत्या करने के बाद यह गिरोह शव को नवगछिया रेल इलाके में या फिर लोकल इलाके में लाकर फेंक रहे हैं. गिरोह के शूटर खगड़िया, कटिहार, नवगछिया, भागलपुर जिले के हैं. अधिकतर सूटरों की पहचान अच्छे युवक के रुप में होती है और सभी मृदुभाषी है. तेज बाइकिंग में इस गिरोह के सदस्यों का कोई जोड़ नहीं है. पिछले दिनों हुए प्रीतम हत्याकांड,महेश सिंह हत्याकांड, सुकेश हत्याकांड,सरोज हत्याकांड,सुभाष हत्याकांड,पूरीलाल झा हत्याकांड समेत कई ऐसे कांड हैं, जिसमें इस गिरोह के सदस्यों का हाथ है. नवगछिया के पुलिस कप्तान रहे जयंतकांत के समय इस गिरोह के कई सदस्यों को सलाखों के पीछे भेजा गया, लेकिन यह बात उभर कर सामने नहीं आयी. नवगछिया में जितनी भी हत्याएं हो रही है उनमें अधिकतर मामलों में चश्मदीद व्यक्ति के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही है. ऐसे मामले में जिसके साथ पूर्व की दुश्मनी होती है ऐसे लोगों के ही नाम जद किया जाता है,जिससे इस गिरोह के सदस्य बाल-बाल बच रहे हैं. कहा जा रहा है कि असम के सिल्चर निवासी प्रीतम की हत्या में इसी गिरोह का हाथ है.
नवगछिया में आये दिन एक से एक हैरतंगेज वारदातों के सामने आने से आमलोग हतप्रभ व सहमे हैं. आमलोगों का कहना है कि इस तरह के मामले पहली बार वे देख रहे हैं. एक के बाद एक वारदातों ने नवगछिया को उस दिन की याद दिला रहा है जब यहां पर जातीय हिंसा में नरसंहार होते थे.
No comments :
Post a Comment