pp

Blogger Tips and TricksLatest Tips And TricksBlogger Tricks

Thursday, 29 November 2012

लगन में नहीं मिल रहे पंडित

एक तरफ तो लगन का जोर है. दूसरी तरफ पंडितों का जबरदस्त टोटा. खोजने से भी पंडित नहीं मिल रहे. जो हैं वह कहीं न कहीं बुक.

क्यों हो गयी पुरोहितों की कमी 

लगन या पर्व त्योहार के सीजन के अलावा आम दिनों में पुरोहित पूरी तरह से बेरोजगार हो जाते हैं. बिहपुर प्रखंड के बभनगामा गांव के पंडित मदन मिश्र कहते हैं कि पहले यजमानों के भरोसे उन लोगों का परिवार चलता था. आज पूजा कराने के बाद यजमानों की मंशा होती है कि सवा टाका ही दक्षिणा दिया जाये. श्री मिश्र कहते हैं इसी कारण उन्होंने अपने बेटों को इस धंधे से अलग कर जीवीकोपार्जन का दूसरा उपाय तलाशने को कहा. क्षेत्र के प्रसिद्ध पंडित व्याकरणाचार्य अरुण कुमार मिश्र करते हैं कि सिर्फ श्राद्ध, लगन और पर्व त्योहारों में ही पंडितों को कमाई होती है. पार्ट टाइम पूजा पाठ कराने वाले व गौरीपुर उा विद्यालय के संस्कृत के शिक्षक नीरज कुमर कहते हैं कि नवगछिया के पंडित संगठित नहीं हैं. पुरोहितों की आर्थिक स्थिति बद से बदतर होती जा रही है. ऐसे में लोग अब इस पेशे में नहीं आना चाहते हैं. नवगछिया मैथिल ब्राह्मण संघ के अनुमंडलीय अध्यक्ष छंगुरी मिश्र ने कहा कि महज 10 फीसदी पुरोहितों ने ही अपनी अगली पीढ.ी को भी पुरोहित के पेशे से जोड़ा है.

बेगूसराय में पंडितों का संगठन

मैथिल ब्राह्मण संघ के छंगुरी मिश्र ने बताया कि बेगूसराय के पंडित सूर्यकांत पाठक ने बेगूसराय में पूजा पाठ कराने वाले पंडितों का एक संगठन तैयार किया. दक्षिणा निर्धारित किया. लगन, श्राद्ध व त्योहारों के लिए पंडित की बुकिंग के लिए एक जगह निर्धारित है. यहां पर यजमान आकर पहले पंडित जी की फीस देते हैं. फिर रसीद लेकर वे निश्‍चिंत हो जाते हैं कि अमुक तिथि को पंडित जी निर्धारित स्थल पर आकर अनुष्ठान संपत्र करवायेंगे. मिलनेवाली फीस का कुछ हिस्सा पंडितों के कल्याण कोष में जाता है और बांकी पंडित जी को मौके पर दे दिया जाता है. वहां यह संगठन करीब 10 वर्षों से काम कर रहा है. पिछले दिनों एक खास मौके पर पंडित जी को संगठन द्वारा बोनस दिया गया था. अब संगठन के सभी सदस्यों को एक निर्धारित पगार देने का प्रयास किया जा रहा है. संगठन के माध्यम से ही सभी सदस्यों का बीमा करवाया गया है.


No comments :

Post a Comment