" खरीक के राघोपुर पंचयात के बड़ी अलालपुर गांव में एक चापानल से अत्यधिक शीतल जल निकलता है"
पिछले तीन माह में मैंने कई लोगों से इस तरह की बात सुन रहा था. कोई कहता था " पानी इतना ठंडा था कि पीते ही दांत में कनकनी होने लगी. मैं इस तरह की चर्चा को हवाबाजी मानकर नजरअंदाज कर देता था. संयोग कहिये ! कल मैं भागलपुर गया था. देर शाम ऑटो से घर लौट रहा था. रास्ते में ऑटो चालक ने भी मुझे उस चापानल के बारे में बताया, मैंने कहा आज हकीकत पता चल ही जायेगा। राघोपुर पंचयात के बड़ी अलालपुर गांव के शिव मंदिर के पास चालक ने ऑटो को एका एक रोक दिया। हमलोग चापानल की ओर बढ़ चले थे। चापानल के पास ही लोटा रखा था. मुझे एक लोटा पानी निकल कर दिया गया. पहले मैंने पानी को हाथ पर लिया। वास्तव में यह सामान्य चापानल से निकलने वाला पानी नहीं था. पानी इतना ठंडा था जितना हमलोग ठंडा हमलोग शीतल पेय पीते हैं. मुझे विश्वास हो गया कि वास्तव में उक्त चापानल अपने आप में अजूबा है.अलालपुर गांव में के लोग 14 वर्षों से इस चापानल के शीतल जल का सेवन कर रहे हैं. 14 वर्ष पहले इस चापानल को सरकारी स्तर से लगाया गया था. ग्रामीणों ने चापानल के जल की कई खूबियों के बारे में बताया। घर आ कर मैंने जीबी कॉलेज के रसायन शास्त्र के विभागाध्यक्ष एवं रूलर वाटर सोसायटी के संस्थापक डा अशोक झा से संपर्क किया तो उन्होंने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि यह शोध का विषय है. क्योंकि सामन्यतः चापानल से 20 से 22 डिग्री सेल्सियस ठंडा पानी आता है. लेकिन अनुमानतः उक्त चापानल से 10 डिग्री जितना ठंडा पानी आ रहा है. जल के रसायनिक जाँच के बाद ही शीतल जल आने का रहस्य पता चल पायेगा। अलालपुर गांव के लोग इस चापानल को धरोहर मानते हैं. ग्रामीणों और इलाके के लोगों को प्रशासन और सरकार से आशा है कि इस चापानल कि संरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाये जायेंगे।
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