जनता का विश्वास प्रशासन से उठ चुका है. रेलवे में सफर करना खतरे से खाली नहीं रहा. जीआरपी में जंगल राज कायम हो गया है. पुलिस-अपराधी गंठजोड़ के कारण ट्रेनों में अपराध बढ. रहे हैं. कब किसकी हत्या हो जाये, कब कौन लुट जाये यह चिंता का विषय है. महाधरना तो मात्र टेलर है. फिल्म अभी बाकी है. यह बातें शनिवार को बिहार बंगाली समिति के बैनर तले आयोजित महाधरना कार्यक्रम में वक्ताओं ने कही. पूर्व नियोजित महाधरना कार्यक्रम में बिहार बंगाली समिति के साथ बिहार नव निर्माण मंच, रॉटरी क्लब ऑफ भागलपुर, बीएसएसआर यूनियन के अलावा भागलपुर की पूर्व मेयर डॉ वीणा यादव, कांग्रेस नेता विजय कुमार सिंह यादव धावक, राजद नेता चक्रपाणि हिंमाशु आदि भी मौजूद थे.
वक्ताओं ने कहा कि हत्या, डकैती, चोरी, छिनतई, झपटमारी आदि घटनाओं ने जनमानस को भय से उबरने का मौका ही नहीं दिया है. अपराधी शहरों और गांवों के अलावा रेलवे में भी अपराध करने से बाज नहीं आते हैं. चलती रेल गाड़ियों में सुरक्षा तंत्र के अभाव में आये दिन छिनतई, नशा खुरानी, चोरी, डकैती तथा हत्या जैसी घटनाएं आम हो गयी हैं. रेलवे प्लेटफॉर्म व रेल गाड़ियों में अपराध को अंजाम देनेवाले बहुत से गिरोह बिहार रेल खंड में सक्रिय हैं. उनका मनोबल प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता से दिनोंदिन बढ.ता जा रहा है.
हाल ही में असम निवासी प्रीतम भट्टाचार्य को जिस प्रकार नवगछिया स्टेशन से अगवा कर मौत के घाट उतार दिया गया एवं अज्ञात महिला की मौत को जिस प्रकार अपराधियों ने अंजाम दिया, इन सारी घटनाओं में पुलिस व प्रशासन मूक दर्शक की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा. इस परिस्थिति में आम जनता का यह दायित्व बनता है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार व प्रशासन की कुंभकर्णी निंद्रा को तो.डे.
इस अवसर पर बिहार बंगाली समिति के निरुपम कांति पाल, संजय कुमार घोष, आलय बनर्जी, गणेश राय, अभ्लान डे, अमिता मैत्रा, मनि राय, कल्यान घोण, देवाशीष बनर्जी, देवाशीष नंदी, गौतम बनर्जी, सुभय सर्वाधिकारी, प्रशीस राय, नमिता राय, अजीत कुमार साहा, उत्तम देवनाथ, चींटू दत्ता, काकुली बनर्जी, चितरंजन दास, अमन खान आदि ने अपने-अपने वक्तव्य दिये.
वक्ताओं ने कहा कि हत्या, डकैती, चोरी, छिनतई, झपटमारी आदि घटनाओं ने जनमानस को भय से उबरने का मौका ही नहीं दिया है. अपराधी शहरों और गांवों के अलावा रेलवे में भी अपराध करने से बाज नहीं आते हैं. चलती रेल गाड़ियों में सुरक्षा तंत्र के अभाव में आये दिन छिनतई, नशा खुरानी, चोरी, डकैती तथा हत्या जैसी घटनाएं आम हो गयी हैं. रेलवे प्लेटफॉर्म व रेल गाड़ियों में अपराध को अंजाम देनेवाले बहुत से गिरोह बिहार रेल खंड में सक्रिय हैं. उनका मनोबल प्रशासन की लापरवाही और उदासीनता से दिनोंदिन बढ.ता जा रहा है.
हाल ही में असम निवासी प्रीतम भट्टाचार्य को जिस प्रकार नवगछिया स्टेशन से अगवा कर मौत के घाट उतार दिया गया एवं अज्ञात महिला की मौत को जिस प्रकार अपराधियों ने अंजाम दिया, इन सारी घटनाओं में पुलिस व प्रशासन मूक दर्शक की तरह हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा. इस परिस्थिति में आम जनता का यह दायित्व बनता है कि शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से सरकार व प्रशासन की कुंभकर्णी निंद्रा को तो.डे.
इस अवसर पर बिहार बंगाली समिति के निरुपम कांति पाल, संजय कुमार घोष, आलय बनर्जी, गणेश राय, अभ्लान डे, अमिता मैत्रा, मनि राय, कल्यान घोण, देवाशीष बनर्जी, देवाशीष नंदी, गौतम बनर्जी, सुभय सर्वाधिकारी, प्रशीस राय, नमिता राय, अजीत कुमार साहा, उत्तम देवनाथ, चींटू दत्ता, काकुली बनर्जी, चितरंजन दास, अमन खान आदि ने अपने-अपने वक्तव्य दिये.

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