ऋषव मिश्रा कृष्णा▪नवगछिया
नवगछिया के कोसी तटीय क्षेत्रों के लिए इन दिनों कोसी की कृत्रिम धारा काल बनी हुई है. करीब 30 वर्ष पहले अनुमंडल के सीमांत क्षेत्र से बहने वाली कोसी नदी की बुढ.ना धार को इस बार जल संसाधन विभाग ने पुनर्जीवित कर दिया है. इस कारण नवगछिया में कोसी की धारा आक्रमक होकर इन दिनों तबाही मचा रही है. कोसी के कोर्स चेंज करने से यह धारा मृत प्राय हो गयी थी. कोर्स चेंज करने से नई धारा के कटाव से मधेपुरा जिले के कई गांवों में भारी तबाही मची थी. 30 वर्षों से जारी कटाव में मधेपुरा के कई गांवों के लोग बेघर हो गये थे.
प्रभाव का नहीं था अंदेशा
इस कटाव पर अंकुश लगाने के लिए जल संसाधन विभाग के कोपरिया डीवीजन ने बुढ.ना धार को पुनर्जीवित करने का निर्णय ले लिया. उस वक्त विभाग ने इससे होने वाले विपरीत परिणाम के बारे में नहीं सोचा था. करोड़ों रुपये खर्च कर बुढ.ना धार को पुनर्जीवित करने का कार्य इसी वर्ष पूरा हुआ है.
कोसी में समा रही जमीन
इन दिनों नवगछिया के बिहपुर प्रखंड के कई गांवों की भूमि तेजी से कोसी के गर्त में समा रही है. कई किसान भूमिहीन होने के कगार पर हैं. खरीक के पीपरपांती गांव के नबटोलिया में यह धारा दो दर्जन से अधिक परिवारों को बेघर कर चुकी है. पिपरपांती में लगभग तीन करोड़ की लागत से जियो बैग टेक्नोलॉजी से किये गये कटाव निरोधी कार्य को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है. यहां जमीनदारी बांध नदी से 10 फीट से भी कम दूरी पर है. खरीक के पास बुढ.ना कृत्रिम धार का अस्तित्व प्रत्यक्ष रुप से देखा जा सकता है. पीपरपांती के पास कोसी नदी की दो धारा आकर मिल रही है. यहीं से कोसी की धारा और ज्याद वेगवती होकर नवगछिया के सकुचा और रंगरा के मंदरौनी में पहले से भी ज्यादा प्रलयंकारी कटाव कर रही है.
25 पंचायतों के अस्तित्व पर संकट
कोसी के बदले मिजाज को देखकर लगता है कि आने वाले पांच वर्षों में एक बार फिर नवगछिया के नक्शे से करीब 25 पंचायतों का अस्तित्व पूरी तरह से मिट जायेगा. आने वाले दिनों में राजमार्ग व रेल लाइन को भी कोसी की धारा से खतरा हो सकता है. इन जगहों पर कटाव रोकना जल संसाधन विभाग के लिए बड़ी चुनौती होगी.
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