ऋषव मिश्रा कृष्णा
नवगछिया▪इसी वर्ष 24 फरवरी को एक सनसनीखेज घटना लोगों के सामने आयी थी. चापर गांव की एक दंपती के एक साथ रेल से कट कर जान देने की दुखद घटना लोगों के सामने थी. थाने में अप्राकृतिक मौत का मामला दर्ज किया गया था. लेकिन,जब पुलिस ने घटना की छानबीन क ी तो पता चला कि इस कहानी के पीछे एक और कहानी है. बबलू कुमार और बिजली देवी ने आठ साल पहले प्रेम विवाह किया था. उन्हें कोई संतान न होने पर बबलू बिजली से खित्र रहता था. इस दौरान बबलू का दूसरी महिलाओं के साथ भी संबंध बन गये थे. विरोध करने पर बिजली को प्रताड़ित किया जाने लगा था. इससे तंग आकर बिजली आत्महत्या के इरादे से आ रही ट्रेन से कटने के लिए भागी. बबलू ने दौड़ कर उसे बचाना चाहा. लेकिन,वह बिजली को नहीं बचा सका. बदहवाश अवस्था में बबलू घर आया. चापर गांव का ही कुख्यात अपराधी मोती यादव बिजली के दूर के रिश्ते में भाई लगता था. मोती ने जैसे ही बिजली की मौत की खबर सुनी तो वह आग बबूला हो गया और बबलू को घर से उठा लिया. एक चार चक्का वाहन पर बैठा कर वह बबलू को रेल ट्रैक की ओर ले गया और अपने अन्य सहयोगियों की मदद से उसकी हत्या कर रेल ट्रैक पर फेंक दिया. तत्कालीन रेल थानाध्यक्ष ने रेलवे के वरीय पदाधिकारियों के निर्देश पर नये सिरे से जब अनुसंधान किया,तो घटना की साई सामने आयी. इस मामले में संलिप्त ज्यादातर अपराधी जेल भेज दिये गये हैं. अब पुलिस के लिए न्यायालय में इस घटना की साई लाकर दोषियों को सजा दिलवाना भी एक चुनौती की तरह ही है.

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