दिलीप की बढ.ती लोकप्रियता बना उसकी हत्या का कारण
18 अगस्त को अपहरण के बाद हुई थी हत्या |
दिलीप की बढ.ती लोकप्रियता बना उसकी हत्या का कारण
ऋषव मिश्रा कृष्णा ▪ नवगछिया, एक समय था जब दिलीप पूर्व जिला पार्षद अरविंद यादव के लिए अपनी जान देने को भी तैयार रहता था. कहा जाता है कि दिलीप ने पंचायत चुनाव में अरविंद को जिताने लिए एड़ी-चोटी एक कर दी थी. लेकिन, भूदान में मिली जमीन को लेकर दिलीप और अरविंद के परिवारों के बीच संबंध बिगड़ गये. दिलीप और अरविंद एक दूसरे के धुर विरोधी हो गये. अपराध की दुनिया का मास्टर रंगरा के साधोपुर गांव निवासी अरविंद यादव इन दिनों राजनीति का ककहरा पढ. रहा था. जिला पार्षद रहते उसने विधानसभा चुनाव में भी अपना भाग्य आजमाया था. उसकी महत्वाकांक्षा की राह में गांव का ही दिलीप यादव रोड़ा बन गया था. दिलीप की गांव में लगातार बढ.ती लोकप्रियता अरविंद के आंखों का कांटा बन गया था. अपनी मृदुभाषिता और संगनठनात्मक शक्ति से दिलीप ने गांव में अपने सर्मथकों की एक लंबी कतार खड़ी कर दी थी. वह अरविंद यादव के लिए चुनौती बन गया था. लेकिन, दिलीप की एक कमजोरी थी वैसी गांव की एक विधवा महिला. दिलीप का उससे संबंध था. शादी के बाद भी दिलीप का उस विधवा महिला से संबंध बना रहा.
कहा जाता है कि उस विधवा महिला के माध्यम से ही दिलीप को 18 अगस्त की रात को बुलाया गया. रास्ते में ही अपहरण कर कोसी किनारे ले जाया गया. इस दरम्यान अपहर्ताओं ने दिलीप को कोसी किनारे पहले दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, फिर मुंह में पिस्तौल घुसा कर गोली मार दी. और कोसी नदी में दिलीप की लाश को फेंक दिया. दिलीप का शव दो दिनों के बाद सोहरा घाट से पुलिस ने बरामद किया. पुलिस ने तुरंत विधवा महिला और अरविंद यादव को गिरफ्तार कर लिया. अरविंद ने उस समय पुलिस के समक्ष स्वीकार किया था कि अगर दिलीप को वह नहीं मरता तो वह उसे मार देता. इस मामले में कुछ और लोग भी गिरफ्तार कर लिये गये हैं और कुछ की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है.
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Friday, 7 September 2012
विधवा से अवैध संबंध बनी दिलीप की कमजोरी
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