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Sunday, 4 November 2012

थियेटर, सिनेमा और भीड़ की रोचक दास्तां



1964 में सुनील दत्त ने 113 मिनट की फिल्म बनायी थी-‘यादें’. अपने आप में एक तरह का अद्भुत प्रयोग था फिल्म में. 113 मिनट परदे पर सिर्फ और सिर्फ सुनील दत्त ही दिखायी पड़ते हैं.
हां, बैकग्राउंड से उनकी पत्नी नरगिस दत्त की आवाज जरूर सुनायी पड़ती थी. दो नवंबर को रिलीज हो रही ‘अता-पता-लापता’ में परदे पर एक साथ एक कलाकार नहीं, बल्कि 170-175 कलाकार नजर आयेंगे. इसका निर्देशन राजपाल यादव ने किया है. बतौर निर्देशक यह उनकी पहली फिल्म है.
‘अता-पता-लापता’ बनाने की योजना राजपाल यादव ने तीन वर्ष पहले बनायी थी. फिल्म का टाइटल उन्होंने देसी मुहावरों जैसा रखने का तभी निर्णय लिया था. फिल्म को थियेटर से फिल्म और फिर थियेटर के इर्द-गिर्द घुमाया गया है. पूरी कहानी को गीत-संगीत के माध्यम से पेश किया है, जो देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति को व्यंग्यात्मक रूप दिखाता है.
‘अता-पता-लापता’ दारा सिंह की अंतिम फिल्म है. राजपाल ने फिल्म की शूटिंग तो कर ली, किंतु दारा सिंह की आवाज डब करने के लिए उन्हें काफी मशक्कत करनी पड़ी.
गंभीर बीमारी में भी दारा सिंह ने फिल्म की डबिंग की. दारा सिंह के अलावा फिल्म के दो और सितारे क्रमश: विवेक जोश और विनित कपूर इस अब इस दुनिया में नहीं हैं. फिल्म उनके प्रति भी श्रद्धाजंलि होगी. फिल्म में मुख्य भूमिकाएं आशुतोष राणा, किरण राठौर, जाकिर हुसैन और असरानी की हैं.

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