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Monday, 16 December 2013

एकता मार्च में नहीं दिखी सांगठनिक एकता


नवगछिया भाजपा एकता मार्च में रविवार को सांगठनिक एकता नहीं  देखी गयी. कल तक ऐसे कार्यकर्ता जिनक ा नाम सामने आते ही भाजपा की छवि लोगों के मन मस्तिष्क में कौंध जाती थी. ऐसे नेताओं की उपस्थिति भारत एकता यात्रा में नहीं देखी गयी . भाजपा के ही शुभचिंतक व वरिष्ठ भाजपाइयों का कहना है कि पार्टी की वर्तमान हालात सन 1977 के तरह है. वर्तमान में नरेंद्र मोदी की लहर है तो सन 1977 में जनता पार्टी की लहर थी. सन 1977 में सूबे के अधिकांश सीटों पर जनता पार्टी के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज किया था, लेकिन नवगछिया में उस समय भी पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही थी. इसका परिणाम यह निकला कि गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र में अनिल यादव और बिहपुर विधानसभा क्षेत्र में रामवृक्ष कुमर चुनाव हार गये थे. जबकि विधानसभा चुनाव से पूर्व हुए लोकसभा चुनाव में जनता पार्टी के नेता ज्ञानेश्‍वर यादव ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी. वरिष्ठ भाजपा नेताओं का कहना है कि उस समय विधानसभा चुनाव के टिकट की दावेदारी को लेकर पार्टी आंतरिक कलह से जूझ रही थी. 

कहते हैं नेता 

रविवार को एकता यात्रा कार्यक्रम में मौजूद नवगछिया के वार्ड पार्षद व भाजपा नेता विनोद मंडल का कहना है कि हालात 1977 के तरह ही है. पार्टी के स्थानीय नेतृत्व में समन्वय और नेतृत्व क्षमता का अभाव है. वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को हाशिये पर कर दिया गया है. बिहपुर में एक समय भाजपा की रीढ. कहे जाने वाले महंथ नवल किशोर दास का कहना है कि भाजपा की नवगछिया इकाई को कांग्रेस की दिल्ली के हार से सबक लेना चाहिए. दिल्ली में कांग्रेस पार्टी के जनप्रतिनिधि संगठन से दूर चले गये थे. परिणामत: पराजय का मुंह देखना पड.ा. वर्तमान में नवगछिया की भी ऐसी ही स्थिति है. जब से बिहपुर में भाजपा सत्ता में आयी कई लोगों को हाशिये पर कर दिया गया. विरोध इसका निदान नहीं है. वरिष्ठ नेताओं को ही पहल कर इस तरह के माहौल को दूर करना होगा. भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष वरिष्ठ नेता सुभाष साहू ने अपने न आने का कारण घरेलू कार्य में उलझन बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि कहीं न कहीं कमी है. आने वाले दिनों में वे इसे दूर करने के लिए प्रयास करेंगे. संघ विचारधारा से प्रेरित और भाजपा के पूर्व महामंत्री मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि किसी भी वरिष्ठ नेता को निमयत: सूचना नहीं दी गयी है. यहां तक कि भाजपा के वरिष्ठ नेता महंथ नवल किशोर दास को एक प्रखंड स्तर के कार्यकर्ताओं के माध्यम से अनौपचारिक सूचना मिली थी. ऐसे माहौल की निंदा की जानी चाहिए. इसमें सुधार की आवश्यकता है. भाजपा की महिला नेता पूनम चौरसिया ने उन्हें तो जिलाध्यक्ष या जिला संगठन के स्तर से कभी भी सूचना नहीं दी जाती है.

ये चिर-परिचित चेहरे नहीं दिखे

कल तक भाजपा के चिर परिचित चेहरे के रुप में चर्चित के पूर्व जिलाध्यक्ष सुभाष साहू, अनंत साहू, शंभु प्रसाद सिंह, जिला उपाध्यक्ष महंथ नवल किशोर दास, किसान मोरचा के पूर्व जिलाध्यक्ष परमानंद चौधरी, वरिष्ठ नेता पंचानंद सिंह, जनसंघ के काल से सक्रिय सत्य प्रकाश झा, फ ूलेंद्र मिर्श, महेंद्र यादव, विरेंद्र कुमार उर्फ बिट्ठल बाबा, दिनेश कुमर, पूर्व जिला महामंत्री मनोज कुमार पांडेय, भाजपा महिला मोरचा के प्रदेश कार्य समिति सदस्य व महिला मोरचा के पूर्व जिलाध्यक्ष पूनम चौरसिया, वरिष्ठ नेता अरविंद चौधरी आदि कई नेता कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे.

कहते हैं जिलाध्यक्ष 
जिलाध्यक्ष सुबोध कुमार सिंह कुशवाहा ने कहा कि सबों को सूचना दी गयी है. अगर कोई वरिष्ठ नेता कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हुए तो वे जरूर किसी निजी आवश्यक कार्य में होंगे 

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